Saturday, 12 October 2013

तुमसे कहा था ना़

तुमसे कहा था ना
मुझे पयार न करना
मेरे रंग में न रंगना
मैं एक खवाब हूँ
अँघेरों में सजता हूँ
तनहाई मेरी सहेली है
तू गुम हो जाएगा
मंजिल से बिछड् जाएगा
पर तू न माना
हो गया न
तुझको मुझसे पयार,
मुझे भी समां लिया
अपनी आगोश में,
तारों के हिंडोले पर मैं
झूलने लगी,
तनहाईयाँ मेरी खुशियों
के रंग भरने लगी,
आजा सजायें हम
नया आशियाँ,
जहाँ मैं हूँ और
बस तुम ही तुम हो।