Thursday, 10 December 2020

मन के कैदी..

 सपनों के झंझावातों में 

दिल के राज गहरा जाते हैं।।

भविष्य खुशनुमा बनाने को 

हम मन के कैदी बन जाते हैं।।

नियम कायदों पर चलने को 

हर पल मजबूर हुए जाते हैं।।

रोशनी ले चले हम धूप की 

अंधेरी रातों को जगाये जाते हैं।।

जहरीला धुआँ देता है दस्तक 

प्राणों की चिता जलाए जाते हैं।।

जीवन सांसों से बंधी डोर है'पूनम' 

टूटने तक जिये चले जाते हैं।।

मेरे हमसफ़र

 बँधा है एक रिश्ता तुमसे 

रूह का रूह से मिलन हो जैसे।।

पहली नजर का था वो प्यार 

कुछ ना कहके सब कह दिया जैसे।।

तुम्हें देखने को तरसती आँखें 

छलके ऐसे सागर हो जैसे,।।

रातों की नींद तुमने चुराई मेरी 

बनकर एक हंसी ख्वाब हो जैसे।।

इन आँखों में नशा लिए फिरती हो 

मयखाने में छलकता जाम हो जैसे।।

कभी तो मेरे दिल में झाँको तुम भी 

कुछ शब्द लिख टूगा शायरों जैसे।।

खिला तुम्हारा हुस्न 'पूनम'रात में 

चाँद भी शरमाया चाँदनी के जैसे।।


मीला