Thursday, 10 December 2020

मेरे हमसफ़र

 बँधा है एक रिश्ता तुमसे 

रूह का रूह से मिलन हो जैसे।।

पहली नजर का था वो प्यार 

कुछ ना कहके सब कह दिया जैसे।।

तुम्हें देखने को तरसती आँखें 

छलके ऐसे सागर हो जैसे,।।

रातों की नींद तुमने चुराई मेरी 

बनकर एक हंसी ख्वाब हो जैसे।।

इन आँखों में नशा लिए फिरती हो 

मयखाने में छलकता जाम हो जैसे।।

कभी तो मेरे दिल में झाँको तुम भी 

कुछ शब्द लिख टूगा शायरों जैसे।।

खिला तुम्हारा हुस्न 'पूनम'रात में 

चाँद भी शरमाया चाँदनी के जैसे।।


मीला

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