Friday, 26 April 2019

तेरी मेरी दूरी...

तेरी मेरी दूरी मुझको
आकाश पाताल सी लगती है
जिनका मिलन है असम्भव
बिन प्रलय, बिन हलचल,
क्यों नहीं धरा हाहाकार करती
व्योम से मिलने को चलती
एक निमिष मात्र खड़ी रहती है
सूनी अखियाँ तकती रहती हैं,
कब आएगी वो पावन बेला
ज्वालामुखी बनेगा झूला,
बादलों की शहनाई सी गूंज
बरखा नृत्य करेगी झूम-झूम,
इंद्रधनुष सजेगा इनकी सेज
वो देखो आ गयी इठलाती रेल,
दुल्हन सी सजी इस धरती को
उतर आया आकाश भी देखो
समेटने अपनी आगोश में,
फूल बरसाए देवताओं ने भी
इस अनोखे मिलन बंधन को देख।
       ( Dimpy )



1 comment:

  1. bahut khoobsurat rachna lekhan aapka saarthak rachana aapki meeta ji

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