Tuesday, 30 April 2019

रबगबिरंगे सपने

लापता हूँ कब से मैं ख्वाबो के जहां में
जहाँ मैं देखती हूँ रंगबिरंगे सपने जो
मुझे ले जाते हैं उड़न-खटोले में बिठाकर
जन्नत की सैर कराते हैं, जहाँ मैं देखती हूँ
सुन्दरतम अवरणनीय दृश्य,
मेरे ख्वाबो का जहां
मेरे समक्ष प्रत्यक्ष खड़ा था,
जिसे मैने कभी सजाया थासिर्फ अपने सपनोँ में,
परीयों का देश था
रुपहली चादर लिए तितलियों का बसेरा था,
बादलों का झुरमुट पानी को समेटे था,
फूलों की कहानी भवरों की जबानी थी,
सारी प्रकृति मुस्कुराहट बिखेरे थी,
मेरे कुछ हसीन ख्वाब इन्ही में सिमटे हुए थे,
जो मुझे सिर्फ स्वर्गलोक उड़ा लिए जा रहे थे,
यम के उस दरबार मे, जहाँ उर्वशी का नृत्य
मुझे रिझाने के लिए प्रस्तुत था-औऱ मेरे वो
रंगबिरंगे सपने यही पर विलीन हो गए।।

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