Thursday, 10 December 2020

मन के कैदी..

 सपनों के झंझावातों में 

दिल के राज गहरा जाते हैं।।

भविष्य खुशनुमा बनाने को 

हम मन के कैदी बन जाते हैं।।

नियम कायदों पर चलने को 

हर पल मजबूर हुए जाते हैं।।

रोशनी ले चले हम धूप की 

अंधेरी रातों को जगाये जाते हैं।।

जहरीला धुआँ देता है दस्तक 

प्राणों की चिता जलाए जाते हैं।।

जीवन सांसों से बंधी डोर है'पूनम' 

टूटने तक जिये चले जाते हैं।।

मेरे हमसफ़र

 बँधा है एक रिश्ता तुमसे 

रूह का रूह से मिलन हो जैसे।।

पहली नजर का था वो प्यार 

कुछ ना कहके सब कह दिया जैसे।।

तुम्हें देखने को तरसती आँखें 

छलके ऐसे सागर हो जैसे,।।

रातों की नींद तुमने चुराई मेरी 

बनकर एक हंसी ख्वाब हो जैसे।।

इन आँखों में नशा लिए फिरती हो 

मयखाने में छलकता जाम हो जैसे।।

कभी तो मेरे दिल में झाँको तुम भी 

कुछ शब्द लिख टूगा शायरों जैसे।।

खिला तुम्हारा हुस्न 'पूनम'रात में 

चाँद भी शरमाया चाँदनी के जैसे।।


मीला

Friday, 18 October 2019

बा-बस्ता

तुझसे बा-बस्ता हुई जान मेरी

प्यार में दीवाना मैं होने लगा

फितूर तेरा मुझ पर छाने लगा

बादलों में चांद जैसे जा छुपा!

Tuesday, 30 April 2019

रबगबिरंगे सपने

लापता हूँ कब से मैं ख्वाबो के जहां में
जहाँ मैं देखती हूँ रंगबिरंगे सपने जो
मुझे ले जाते हैं उड़न-खटोले में बिठाकर
जन्नत की सैर कराते हैं, जहाँ मैं देखती हूँ
सुन्दरतम अवरणनीय दृश्य,
मेरे ख्वाबो का जहां
मेरे समक्ष प्रत्यक्ष खड़ा था,
जिसे मैने कभी सजाया थासिर्फ अपने सपनोँ में,
परीयों का देश था
रुपहली चादर लिए तितलियों का बसेरा था,
बादलों का झुरमुट पानी को समेटे था,
फूलों की कहानी भवरों की जबानी थी,
सारी प्रकृति मुस्कुराहट बिखेरे थी,
मेरे कुछ हसीन ख्वाब इन्ही में सिमटे हुए थे,
जो मुझे सिर्फ स्वर्गलोक उड़ा लिए जा रहे थे,
यम के उस दरबार मे, जहाँ उर्वशी का नृत्य
मुझे रिझाने के लिए प्रस्तुत था-औऱ मेरे वो
रंगबिरंगे सपने यही पर विलीन हो गए।।

Friday, 26 April 2019

तेरी मेरी दूरी...

तेरी मेरी दूरी मुझको
आकाश पाताल सी लगती है
जिनका मिलन है असम्भव
बिन प्रलय, बिन हलचल,
क्यों नहीं धरा हाहाकार करती
व्योम से मिलने को चलती
एक निमिष मात्र खड़ी रहती है
सूनी अखियाँ तकती रहती हैं,
कब आएगी वो पावन बेला
ज्वालामुखी बनेगा झूला,
बादलों की शहनाई सी गूंज
बरखा नृत्य करेगी झूम-झूम,
इंद्रधनुष सजेगा इनकी सेज
वो देखो आ गयी इठलाती रेल,
दुल्हन सी सजी इस धरती को
उतर आया आकाश भी देखो
समेटने अपनी आगोश में,
फूल बरसाए देवताओं ने भी
इस अनोखे मिलन बंधन को देख।
       ( Dimpy )



Thursday, 25 April 2019

मौन एक शब्द नहीं

मौन
एक चुप स्वीकृति
कुछ कहने का अंदाज
प्यार का मीठा इज़हार
सच ना कह पाने की जुबां
झूठ ना बोलने का अंदाज़,
मीठा लगता है
जब प्यार होता है,
कड़वा लगता है
जब क्रोध होता है,
कितना सरल है ये शब्द
उतना ही कठिन है इसका सफर,
चलो इस(मौन) रास्ते पर
तो कांटे मिलते हैं,
सोचो गर तो
मन भी मूक हो जाता है,,
इसको धारण करो तो
संयम आता है,
बलवान हो जाता है धीरज,
आत्मा को मिलता है-
एक शांत रैन बसेरा,
आंखों से निर्मल जल बहता है,
भावनाओं का समंदर बनता है,
जानना हो गर जीवन-सत्य
तो 'मौन' में ही छुपा संसार है।
 
(स्वरचित कविता)