मैंने संजोया एक सपना
अपने हरदय विशाल में
एक अकुलाहट होती है
मेरे मन के आॅगन में,
तुम आ जाओ पी्त बनकर
मेरे इंदरधनुषी आँचल में,
क्षितिज हो जाए सारा मेरा
मेरे खवाबों के जहाँ में,
धैरय की तूलिका से लिखूँ
अपने सपनों का संसार मैं,
ऐसा परभात आ जाए जीवन में
करूँ बीते पलों को साकार मैं ।
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