जब भी नयन सजल होते हैं
तुम सामने आ जाते हो
मेरी श्रद्धा बन कर तुम
भक्ति रस जगा जाते हो
आस्था की एक लकीर
विश्वास मेरा जीत लेती है
मेरे माथे का चन्दन बन
एक अमिट छाप
छोड़ चले जाते हो
मै ढूढती हूँ
स्वप्निल आकाश में
एक ध्रुवतारा
जो आकाश-गंगा की परछाईयो
में शुन्य बन मेरी साधना को
भक्ति में समाविष्ट कर जाता है,
और
मैं एक भिक्षुक की भांति
इन्ही सजल नेत्रों से
ढूढती ही रह जाती हूँ
सिर्फ तुमको ! !
तुम सामने आ जाते हो
मेरी श्रद्धा बन कर तुम
भक्ति रस जगा जाते हो
आस्था की एक लकीर
विश्वास मेरा जीत लेती है
मेरे माथे का चन्दन बन
एक अमिट छाप
छोड़ चले जाते हो
मै ढूढती हूँ
स्वप्निल आकाश में
एक ध्रुवतारा
जो आकाश-गंगा की परछाईयो
में शुन्य बन मेरी साधना को
भक्ति में समाविष्ट कर जाता है,
और
मैं एक भिक्षुक की भांति
इन्ही सजल नेत्रों से
ढूढती ही रह जाती हूँ
सिर्फ तुमको ! !
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