इन सोये अरमानो को
एक गीत से सजा दो,
बैठी हूँ बड़ी फुर्सत निकाल
एक गजल तो गुनगुना दो,
नही है मेरा हमकदम कोई
तुम नज़र भर मुस्कुरा दो,
न आये मुझे दिन को चैन
रात को मेरी तुम महका दो,
खवाबो को मेरे पूरा करके
एक हंसीं जिन्दगी जिला दो,
मेरे मन-आंगन में बसकर
मुझ संग एक बार खिलखिला दो,
जिंदा हूँ बस तुम्हारे ही दम पर
मन में मेरी तस्वीर आज तुम बना लो,
हूँ मै "पूनम "अमावस की
चंदा सी चाँदनी आज तुम बरसा दो,
इन सोए अरमानों को
एक गीत से सजा दो !!
एक गीत से सजा दो,
बैठी हूँ बड़ी फुर्सत निकाल
एक गजल तो गुनगुना दो,
नही है मेरा हमकदम कोई
तुम नज़र भर मुस्कुरा दो,
न आये मुझे दिन को चैन
रात को मेरी तुम महका दो,
खवाबो को मेरे पूरा करके
एक हंसीं जिन्दगी जिला दो,
मेरे मन-आंगन में बसकर
मुझ संग एक बार खिलखिला दो,
जिंदा हूँ बस तुम्हारे ही दम पर
मन में मेरी तस्वीर आज तुम बना लो,
हूँ मै "पूनम "अमावस की
चंदा सी चाँदनी आज तुम बरसा दो,
इन सोए अरमानों को
एक गीत से सजा दो !!
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