Friday, 20 September 2013

TUJH PAR LIKHU KAVITA...

अपनी सोच को किन
शब्दों मे ढालूँ ए दोस्त,और
तुझ पर लिखूं कविता !
आकाश की ऊँचाइयों में तू
दिल की गहराइयों में तू
तेरे वजूद को किन
 शब्दों में ढालूँ ए दोस्त,और
तुझ पर लिखू कविता !
भगवान् का दिया उपहार तू
मेरे जीवन का सार तू
जो लम्हे साथ मिलकर बिताये
उन्हें किन
शब्दों में ढालूँ ए दोस्त,और
तुझ पर लिखू कविता !
तू है तो ये जिन्दगी है
तुम बिन "डिम्पी "अधूरी है
तेरे अहसास को किन
शब्दों में ढालूँ ए दोस्त,और
तुझ पर लिखूं कविता !!!



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