दिन भी अब श्यामल हो चला है
कब आओगे प्रीतम मोरे
प्रीत में तेरी रची बसी मै
मौन कैसे रह पाऊँगी,
राधा समान हरदम मै
प्रेम रस ही गाऊँगी,
हताश स्वरों में मेरे आजा
नये नये राग समो जा,
तेरे गुण गान हमेशा
करत करत रैन पसारूंगी,
जीवन प्यासा है मोरा
पानी से इसको तर जा,
श्याम वर्ण ओ प्रीतम मोरे
रास-रंग अब रचा जा,
अंजुली भर पानी लेकर
तुझ संग प्रीत बिसारुंगी,
हिरदय की दीवारों को मेरी
अब प्रेम मन्त्र सिखा जा !!!
दिन भी अब श्यामल हो चला है!
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