जब मै थी अकेली बैठी
तुम कहाँ चले गए थे ,
थक गयी ये अँखियाँ
इंतज़ार में तुम्हारे,
जकड लिया मेरा मन
प्यार ने तुम्हारे,
आँखें मुंद गई मेरी
कल्पना करते तुम्हारी,
कहकशां लगा रही थी
फिजाएं उदास देख सारी ,
उस क्षण कुछ ना था पास मेरे
स्मृतियों के सिवा तुम्हारी,
प्यासी जी रही थी मैं सिर्फ
एक आस लिए तुम्हारी,
जब मैं थी अकेली बैठी
तुम कहाँ चले गये थे?
तुम कहाँ चले गए थे ,
थक गयी ये अँखियाँ
इंतज़ार में तुम्हारे,
जकड लिया मेरा मन
प्यार ने तुम्हारे,
आँखें मुंद गई मेरी
कल्पना करते तुम्हारी,
कहकशां लगा रही थी
फिजाएं उदास देख सारी ,
उस क्षण कुछ ना था पास मेरे
स्मृतियों के सिवा तुम्हारी,
प्यासी जी रही थी मैं सिर्फ
एक आस लिए तुम्हारी,
जब मैं थी अकेली बैठी
तुम कहाँ चले गये थे?
अच्छा लिखते हो..😊
ReplyDeleteआज आपकी yq प्रोफाइल पर "ख्याल आपके शब्द हमारे" देखा..बहुत अच्छा लगा। मेरी बधाई स्वीकार कीजिये..
मैं भी लिखता हूँ ब्लॉग..कभी फुरसत निकालिए..😊💐
शुक्रिया Alok जी🌹🌹🌹🌹
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