Sunday, 15 September 2013

SUHANA MAUSAM.

महका हुआ फूल
बहकी हुई शराब
दूर से चंदा देख रहा है
नशा उसे भी परवान चढ़ा है
तारों की एकरसता देखो
टिम -टिम करते बहक रहे हैं
रोशनी अपनी बिखेर रहे हैं,
वो,देखो एक बादल आया
कोहरा उस पर घना है छाया
जैसे बादल हो नशे में चूर
कभी छुपता कभी निकलता
मद मे वो भी है मजबूर,
हवा भी कैसी है मस्तानी
लहर -लहर के चलती है
साये से अपने सबको मदमाती
झूमती झुमाती खूब चहकती
बिखर रही है सायं -सायं करती
नाच रही है छ्म -छम करती,
क्या हो गया इस प्रकर्ति को देखो
आकाश पाताल सब हुए एक हैं
बरखा बरसी घनघोर है
नाचे मन मेरा बन मोर है!!

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