मैंने न मांगी थी सारे जहाँ की दौलत
सिर्फ तेरा साथ चाहा था,और
पल भर की मोहलत
देख कर एक भरपूर नज़र
कुर्बान जाती रब पर
सिर्फ तेरी मुस्कराहट थी,और
मेरे दिल की हुकूमत
न चाहा उम्र भर का साथ तेरा
सिर्फ तेरे रुखसार की लाली,और
तेरी इजहारे मोहब्बत
माना की हम न चल सकेंगे साथ तेरे
सिर्फ चाहेंगे तुझको,और
आह!भरेंगे दीदार की तेरे
मैंने न मांगी थी। … … !
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