सूरज की सुनहरी किरणें
नये दिन का आगाज है
रुक नहीं आगे बड्र
तेरे दिल की आवाज़ है,
दुःख से जो तू थक गया
उजाला कहाँ से लायेगा
अँधेरा मिटाने जीवन का
संघर्ष कहाँ से लायेगा,
मजबूत बन ,धीरज धर
हाथ पकड उस पथ का
मंजिल पर जिसे पहुचना है,
काँटों की इस नगरी में
गुलाब हमें उगाना है
दहाड़ते शेर की पुकार से
डर कर न बैठ जाना है,
सयम को अपनी दीवार बनाकर
ये लडाई लड़ते जाना है
ख्वाबों को मेरे पूरा करने
खुदा को जमीं पर आना है,
आएगा वो सुनहरा दिन
रूह जिसके लिए रूमानी है
बेरहम इस वक़्त को
शिकस्त हमें दिलानी है
Awsome❤️✍️
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