हर रूप में तुमको चाहा
जब भी प्यार उमड़ा
सिर्फ तुमको ही पूजा
तुम जब भी याद आते हो
नित नये रंग में रंगते हो
जहाँ भी हो ,
जैसे भी हो,
तुम सिर्फ मेरे शेह्ज़ादे हो
जहाँ भी रहो,
जिस रूप में सजो,
तुम सिर्फ मेरे ही प्राण प्यारे हो
कई रूप तुमने बदले
रहे हरदम पास मेरे,
सिर्फ एक उपहार देना मुझको
मरते-मरते एक झलक अपनी ,
दिखा देना मुझको।
हर रूप में तुमको चाहा !
lazawaab
ReplyDeleteAti sunder
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